
बीकानेर. Bikaner News: स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के सभी उत्पाद अब एक ही स्थान पर, “आपणों कृषि बाज़ार” में उपलब्ध होंगे। 5 फरवरी को शुभारंभ होने वाले इस विशेष बाजार का उद्देश्य कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न केंद्रों और महाविद्यालयों के उत्पादों को आमजन तक सीधे पहुंचाना है। कुलपति डॉ. अरुण कुमार ने जानकारी दी कि यह बाजार विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के पास स्थापित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय किसानों, उपभोक्ताओं और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद एक ही स्थान पर मिल सकेंगे।
विशेषताएं और उत्पाद उपलब्धता
- “आपणों कृषि बाज़ार” में कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े कृषि विज्ञान केंद्रों, अनुसंधान केंद्रों, राष्ट्रीय बीज परियोजना, भू-संरक्षण एवं राजस्व सृजन निदेशालय, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय, कृषि महाविद्यालय बीकानेर समेत विभिन्न संगठनों द्वारा विकसित उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जाएगा।
- समय: प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक
- डिजिटल सुविधा: प्रत्येक उत्पाद पर QR कोड होगा, जिससे बिक्री की राशि सीधे संबंधित संस्थान के खाते में जाएगी।
बहुआयामी उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला
कुलसचिव डॉ. देवा राम सैनी के अनुसार, लंबे समय से एक ऐसे प्लेटफॉर्म की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जहां विश्वविद्यालय के सभी उत्पाद एक साथ उपलब्ध हों। “आपणों कृषि बाज़ार” के माध्यम से यह पहल शुरू की जा रही है, जिसमें उपभोक्ताओं को विविध और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिलेंगे।
प्रमुख उत्पाद
- मरू शक्ति यूनिट: मिलेट्स (श्रीअन्न) से बने स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पाद
- बीज एवं पौधे: उन्नत किस्म के फसलों, सब्जियों, फूलों और फलों के बीज व पौधे
- जैविक उत्पाद: प्राकृतिक शहद, आंवला कैंडी, आंवला स्क्वैश, मशरूम
- सजावटी पौधे: कृषि विश्वविद्यालय की नर्सरी के विभिन्न सुंदर पौधे
- रासायनिक खाद मुक्त उत्पाद: जैविक खेती के उत्पाद, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं
स्थानीय उपभोक्ताओं और किसानों के लिए वरदान
डॉ. राजेश कुमार वर्मा (समन्वयक एवं स्नातकोत्तर अधिष्ठाता) ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय के सभी महत्वपूर्ण उत्पादों को विभिन्न इकाइयों से मंगाकर डिस्प्ले और बिक्री के लिए व्यवस्थित किया जा रहा है। इससे बीकानेर के स्थानीय निवासियों को रासायनिक खाद मुक्त, स्वास्थ्यवर्धक और जैविक उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला मिलेगी।
“आपणों कृषि बाज़ार” न केवल विश्वविद्यालय के उत्पादों को एक मंच देगा बल्कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और जैविक उत्पादों की ओर प्रेरित करने में भी सहायक सिद्ध होगा। यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
