
चंडीगढ़. Chautala Family Tree: यह कहानी एक ऐसे गांव की है, जहां से पांच विधायक विधानसभा में पहुंचे। हरियाणा के सिरसा जिले की डबवाली तहसील का चौटाला गांव, जो कभी देश के सियासी इतिहास का अहम हिस्सा बन चुका है। यह गांव सियासी साम्राज्य की ताकतवर नींव रखता है, जहां से एक के बाद एक नेता राजनीति के ऊंचे शिखर पर पहुंचे हैं। जानिए चौटाला परिवार की इस कहानी को, जो हरियाणा की राजनीति का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, और किस तरह से देवीलाल से लेकर उनके पोते दुष्यंत तक की सियासी विरासत को बनाए रखा है।
चौधरी देवीलाल: सियासत का ‘जननायक’ और परिवार की शुरुआत
चौधरी देवीलाल का नाम हरियाणा की राजनीति में एक किले की तरह उभरा है। यह कहानी 1919 की है, जब उनके पूर्वज राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अमरपुरा जालू से चौटाला गांव में आकर बसे। देवीलाल ने राजनीति में कदम 1952 में रखा और तब से ही उनका परिवार हरियाणा की राजनीति में प्रमुख स्थान बना। दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री, और उपप्रधानमंत्री पद पर आसीन रहे देवीलाल का सियासी जीवन किसी सास्कृतिक महाकाव्य से कम नहीं रहा। उन्होंने भारतीय राजनीति में एक नया मुकाम हासिल किया, और उनका परिवार हमेशा ‘किंगमेकर’ की भूमिका में रहा।
देवीलाल के बेटे: ओमप्रकाश चौटाला की सियासी विरासत
देवीलाल के चार बेटे थे – ओम प्रकाश, प्रताप, रणजीत और जगदीश चौटाला। सबसे बड़े बेटे ओमप्रकाश चौटाला ने सियासी दुनिया में कदम रखा और बाद में हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। ओमप्रकाश चौटाला का सियासी सफर कड़ी चुनौतियों से भरा था, जिसमें उन्हें 2013 में जूनियर बेसिक टीचर्स घोटाले में दोषी ठहराया गया और 10 साल की सजा हुई। लेकिन, उनके कद और सियासी पकड़ में कभी कोई कमी नहीं आई।
रणजीत सिंह चौटाला: कभी सियासी उत्तराधिकारी, अब कांग्रेस में
चौधरी देवीलाल के तीसरे बेटे रणजीत सिंह चौटाला को पहले उनके पिता का सियासी उत्तराधिकारी माना जाता था, लेकिन ओमप्रकाश चौटाला को सियासी विरासत सौंपे जाने के बाद रणजीत ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। वह सिरसा जिले के रनिया से दो बार विधानसभा चुनाव हारने के बाद 2019 में निर्दलीय विधायक बने और फिर बीजेपी के साथ गठबंधन कर सरकार का हिस्सा बने।
अजय चौटाला और दुष्यंत चौटाला: नए दौर के नेता
ओमप्रकाश चौटाला के दो बेटे हैं – अजय और अभय चौटाला। अजय चौटाला, जिन्होंने 80 के दशक में राजनीति में कदम रखा था, कई बार विधायक और सांसद रहे हैं। उनकी पत्नी, नैना चौटाला, जो पहले घर तक ही सीमित थीं, अब राजनीति में एक प्रमुख चेहरा बन चुकी हैं। 2014 के विधानसभा चुनाव में नैना चौटाला ने डबवाली से जीत हासिल की, और 2019 में भिवानी से अपनी जीत का परचम लहराया।
दुष्यंत चौटाला: सियासी क्रांति के नए नायक
अजय चौटाला के बड़े बेटे, दुष्यंत चौटाला, जिन्होंने 2013 में सियासत में कदम रखा, ने हरियाणा की राजनीति में एक नई दिशा दी। 2014 में दुष्यंत ने हिसार लोकसभा सीट से जीत हासिल की, और फिर 2018 में अपने चाचा और परिवार से अलग होकर ‘जननायक जनता पार्टी’ (JJP) की नींव रखी। 2019 में, उन्होंने हरियाणा के उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली और बीजेपी के साथ गठबंधन किया। दुष्यंत का सियासी कद अब हरियाणा के युवाओं में बड़ा है, और वे अपनी पार्टी के जरिए बड़े बदलाव के पक्षधर हैं।
दिग्विजय चौटाला: सियासी संघर्ष का दूसरा चेहरा
अजय और नैना चौटाला के छोटे बेटे, दिग्विजय चौटाला, ने भी राजनीति में अपना स्थान बनाना शुरू किया। 2018 में आईएनएलडी से बाहर निकालने के बाद दिग्विजय ने अपने भाई दुष्यंत के साथ मिलकर सियासी मैदान में कदम रखा। 2019 में उनका संघर्ष आईएनएलडी को नुकसान पहुंचाने और जेजेपी को मजबूत बनाने में अहम साबित हुआ। 2023 में उन्होंने अपनी शादी से एक नई चर्चा शुरू की, जिसमें सभी वीआईपी मेहमान शामिल हुए।
अभय चौटाला और उनका प्रभाव
अभय चौटाला, जो ओमप्रकाश चौटाला के छोटे बेटे हैं, का सियासी करियर भी लंबा और शानदार रहा। 2000 में उन्होंने विधानसभा में कदम रखा और सिरसा जिला पंचायत के अध्यक्ष भी रहे। 2019 में उन्हें दुष्यंत चौटाला से पटखनी मिली, लेकिन इसके बावजूद उनका प्रभाव सियासत में कायम रहा। अभय चौटाला ने खेल प्रशासक के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई है, और अब आईएनएलडी में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
चौटाला परिवार का भविष्य: राजनीति का अगला चेहरा
चौटाला परिवार के अगले पीढ़ी के नेता करण और अर्जुन चौटाला हैं। करण चौटाला, जो 2016 में सिरसा जिला पंचायत के उपाध्यक्ष बने, अब अपने पिता के साथ सियासी मैदान में सक्रिय हैं। जबकि अर्जुन चौटाला, जो आईएनएलडी की यूथ विंग के अध्यक्ष हैं, अपने पिता और दुष्यंत के साथ हरियाणा परिवर्तन पदयात्रा में भाग ले रहे हैं।
