
तिरुवनंतपुरम. Collector Bro suspended: केरल की पिनाराई विजयन सरकार ने राज्य के दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें से एक हैं गोपालकृष्णन, जिन्हें ‘कलेक्टर ब्रो’ के नाम से जाना जाता है, और दूसरे हैं एन प्रशांत। इन दोनों अधिकारियों को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित किया गया है।
‘मल्लू हिंदू ऑफिसर्स’ ग्रुप का विवाद
IAS अधिकारी के गोपालकृष्णन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी अधिकारियों के लिए एक धर्म-आधारित व्हाट्सएप ग्रुप ‘मल्लू हिंदू ऑफिसर्स’ बनाया था। यह ग्रुप विवादों में आ गया और उन्हें निलंबित कर दिया गया। गोपालकृष्णन ने पहले दावा किया था कि उनका फोन हैक हो गया था, लेकिन जांच में यह साबित हुआ कि फोन को रीसेट किया गया था, और हैकिंग का कोई सबूत नहीं मिला। इस घटना के बाद, केरल सरकार ने गोपालकृष्णन के खिलाफ कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप उनका निलंबन हुआ। गोपालकृष्णन 2013 बैच के अधिकारी हैं और सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता के लिए भी मशहूर हैं।
एन प्रशांत का फेसबुक पोस्ट विवाद
दूसरी ओर, 2007 बैच के एन प्रशांत ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव **ए जयतिलक पर गंभीर आरोप लगाए थे। प्रशांत ने उन्हें ‘मनोरोगी’ तक कहा और आरोप लगाया कि जयतिलक उनके खिलाफ झूठी और आधारहीन खबरें फैला रहे हैं। इसके बाद प्रशांत को निलंबित कर दिया गया। प्रशांत ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह मेरे लिए एक नया अनुभव है। मैं सरकार की नीतियों की आलोचना नहीं करता, बल्कि मैंने कुछ खास लोगों के कार्यों की आलोचना की थी।”
‘कलेक्टर ब्रो’ की प्रतिक्रिया
प्रशांत ने खुद को “व्हिसलब्लोअर” बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल भ्रष्टाचार और गलत नीतियों को उजागर करना था। उन्होंने संविधान में दिए गए अभिव्यक्ति के अधिकार की बात की और कहा कि उन्हें इस कार्रवाई की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई।
प्रशांत, जो सोशल मीडिया पर ‘कलेक्टर ब्रो’ के नाम से प्रसिद्ध हैं, ने कहा, “मैं IAS अधिकारी बनने की एकमात्र महत्वाकांक्षा के साथ पैदा नहीं हुआ था। मेरे पास अन्य रुचियां और गतिविधियां हैं।”
राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद
यह घटनाएं केरल में प्रशासनिक अनुशासन और अधिकारियों के व्यक्तिगत विवेक के बीच की सीमा को लेकर नई बहस खड़ी करती हैं। राज्य सरकार ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराया है, लेकिन अधिकारियों द्वारा दी गई प्रतिक्रियाओं ने इसे एक बड़े विवाद का रूप दे दिया है। इस कार्रवाई के बाद, यह सवाल उठने लगा है कि क्या किसी अधिकारी को अपनी व्यक्तिगत राय या सरकारी नीतियों पर आलोचना करने का अधिकार है, या फिर उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है?
निलंबन की वजह क्या है?
कुल मिलाकर, केरल सरकार के इस कदम को एक सख्त संदेश माना जा रहा है कि सरकारी अधिकारियों को धर्म और व्यक्तिगत विचारों से परे रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। साथ ही, सोशल मीडिया पर असहमति या आलोचना से बचने की सलाह भी दी जा रही है। यह विवाद और निलंबन प्रशासनिक तंत्र के भीतर आंतरिक राजनीति, व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और सार्वजनिक जिम्मेदारियों के बीच बढ़ती जटिलताओं को दर्शाता है।
