
होशियारपुर. Daljit Singh’s News: टांडा क्षेत्र के कुराला कलां गांव के निवासी दलजीत सिंह ने रविवार को पंजाब सरकार से अपील की है कि वे उनकी ज़मीन वापस दिलाने में मदद करें और धोखेबाज ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। दलजीत सिंह, जो अमेरिका द्वारा निर्वासित किए गए भारतीय नागरिकों के समूह में शामिल थे, अपनी दुखद यात्रा और धोखाधड़ी का दर्द साझा करते हुए सरकार से समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं। दलजीत सिंह के अनुसार, 2022 में उनके ही गांव के एक व्यक्ति ने उन्हें एक ट्रैवल एजेंट से मिलवाया था, जो चोलांग के पास खराल गांव में स्थित था। एजेंट ने उन्हें अमेरिका के लिए सीधी उड़ान का वादा किया और 65 लाख रुपये में यह डील पक्की की। गारंटी के रूप में दलजीत ने अपनी एक एकड़ ज़मीन का अग्रिम एग्रीमेंट सौंप दिया। हालांकि, दलजीत ने कभी नहीं सोचा था कि यह सौदा उनकी पूरी ज़िंदगी की बर्बादी का कारण बनेगा।
कड़ी मेहनत और संघर्ष की कहानी
दलजीत पहले अपनी 4.5 कनाल ज़मीन पर खेती करते थे। हालांकि, वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और जीवनस्तर देने के लिए संघर्ष कर रहे थे। बेहतर जीवन की उम्मीद में उन्होंने यह जोखिम लिया कि शायद उनका जीवन बदल सकेगा। दलजीत की यात्रा नवंबर 2022 में दुबई से शुरू हुई, लेकिन वहां लगभग 18 महीने बिताने के बाद कोई प्रगति न होने पर उसे भारत वापस बुला लिया गया। फिर एजेंट ने उसे दक्षिण अफ्रीका भेजा, जहां वह साढ़े चार महीने तक रहा। कुछ समय बाद, उसे ब्राजील भेजा गया, जहां से उसने खतरनाक डंकी मार्ग से अमेरिका के लिए यात्रा शुरू की।
खतरनाक डंकी मार्ग और कठिन यात्रा
ब्राजील से शुरू होकर दलजीत ने पैदल, टैक्सी और समुद्री मार्ग से यात्रा की। वह पनामा को पार करने में तीन दिन बिता चुका था, और इस यात्रा के दौरान 200 से ज्यादा नदियों, नालों और पहाड़ों को पार किया। दलजीत और उसके यात्रा समूह में शामिल 100 लोगों को कभी-कभी केवल एक वक्त का भोजन मिलता था, और कई बार तो बिना खाए ही दिन बिता रहे थे। इस पूरी यात्रा में आठ अन्य भारतीय भी दलजीत के साथ थे।
चक्रव्यूह में फंसा दलजीत
जब दलजीत मैक्सिको पहुंचा, तो ट्रैवल एजेंट और उसके गांव का आदमी उस पर उसकी शेष साढ़े चार एकड़ ज़मीन का स्वामित्व अपने नाम करने का दबाव बना रहे थे। लगभग एक महीने पहले, एजेंट ने उसकी पत्नी से पावर ऑफ अटॉर्नी ले लिया, जिससे गांव के व्यक्ति ने जमीन का नियंत्रण अपने नाम कर लिया। दलजीत पर लगातार दबाव डाला जा रहा था और उसकी ज़मीन का भविष्य अंधेरे में था।
अमेरिका में गिरफ्तारी और निर्वासन
आखिरकार, 27 जनवरी 2025 को दलजीत को तिजुआना सीमा से अवैध रूप से अमेरिकी सीमा पार कराया गया, जहां उसे अमेरिकी सीमा गश्ती अधिकारियों ने गिरफ्तार किया। दलजीत ने बताया कि उसे हिरासत केंद्र में बुरी तरह से पेश आकर कड़ी सजा दी गई। उसे बेड़ियों में जकड़कर रखा गया और सीमित भोजन दिया गया। बावजूद इसके, वह और अन्य निर्वासितों को विशेष विमान द्वारा भारत वापस भेजा गया। भारत लौटने पर, अमृतसर हवाई अड्डे पर उन्हें भोजन दिया गया, जिसे उन्होंने अपनी थकाऊ यात्रा के बाद भरे मन से खाया।
सार्वजनिक चेतावनी
दलजीत सिंह ने सभी से अपील की है कि वे धोखेबाज ट्रैवल एजेंटों के जाल में न फंसें और अवैध मार्गों से प्रवास करने की कोशिश न करें। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग विदेश जाना चाहते हैं, उन्हें इसे कानूनी तरीके से करना चाहिए, क्योंकि अवैध रास्ते न केवल उनके जीवन को जोखिम में डालते हैं, बल्कि धोखेबाज एजेंटों के लिए भी एक शिकार का काम करते हैं।
दलजीत सिंह का यह अनुभव डंकी मार्ग से अवैध प्रवास की भयावह वास्तविकता को उजागर करता है, जहां लोग बेहतर जीवन की तलाश में न केवल शारीरिक रूप से कष्ट भोगते हैं, बल्कि उनका भविष्य भी अनिश्चित हो जाता है। उन्होंने पंजाब सरकार से अपील की है कि वे उनकी ज़मीन वापस दिलाने में मदद करें और उन धोखेबाज एजेंटों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जो गरीब और असहाय लोगों का शोषण कर रहे हैं।
