
नई दिल्ली. Delhi Assembly election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को एक बड़ा झटका लगा है। डाबड़ी वार्ड की पूर्व पार्षद और नजफगढ़ जिला बीजेपी की उपाध्यक्ष रेखा विनय चौहान, साथ ही उनके पति और 2022 के बीजेपी पार्षद उम्मीदवार विनय चौहान ने आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल होने का निर्णय लिया है। इन दोनों नेताओं ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और ‘आप’ के संयोजक अरविंद केजरीवाल की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस घटना को आगामी चुनावों में बीजेपी के लिए एक चुनौती और ‘आप’ के लिए एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
चुनाव की गर्माहट में ‘आप’ का संगठनात्मक विस्तार
दिल्ली विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद भी आम आदमी पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने में लगी हुई है। डाबड़ी वार्ड की पूर्व पार्षद रेखा चौहान और उनके पति विनय चौहान का ‘आप’ में शामिल होना पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है। इस अवसर पर रेखा चौहान ने अरविंद केजरीवाल की नीतियों और नेतृत्व की सराहना की और कहा कि वह पार्टी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में अपनी पूरी ताकत से काम करेंगी।
Rekha Vinay Chauhan, Ex Councillor Dabri ward and Vice President Najafgarh District BJP and Vinay Chauhan BJP Councillor candidate 2022 joins AAP in Presence of AAP Convenor Arvind Kejriwal
(Source: AAP) pic.twitter.com/HuuPL5ttJR
— ANI (@ANI) January 14, 2025
बीजेपी के लिए नुकसान, ‘आप’ के लिए मजबूती
रेखा चौहान का ‘आप’ में शामिल होना बीजेपी के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है, क्योंकि वह नजफगढ़ क्षेत्र की एक प्रभावशाली और लोकप्रिय नेता रही हैं। उनके पार्टी छोड़ने से बीजेपी की दिल्ली में स्थिति पर असर पड़ सकता है। वहीं, ‘आप’ के लिए यह घटनाक्रम काफी अहम है, क्योंकि इससे पार्टी की ताकत और संगठन को मजबूती मिल सकती है। खासकर दिल्ली के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रेखा चौहान का प्रभाव देखा जाता है।
आने वाले चुनावों में प्रमुख राजनीतिक समीकरण
दिल्ली चुनाव 2025 में बीजेपी, ‘आप’ और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर की उम्मीद है। रेखा चौहान के ‘आप’ में शामिल होने से यह स्पष्ट होता है कि आम आदमी पार्टी भी आगामी चुनावों में बीजेपी को चुनौती देने के लिए अपने संगठन को और मजबूत कर रही है। वहीं, बीजेपी इस स्थिति को अपने लिए नुकसानदेह मानते हुए अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर सकती है।
यह घटनाक्रम दिल्ली चुनावों में एक नया मोड़ ला सकता है, और आने वाले समय में पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों और रणनीतियों में इसे प्रमुख रूप से देखा जाएगा।
