1. परवेश वर्मा:
परवेश वर्मा का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे प्रमुख रूप से उभर कर आया है। वे दिल्ली भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं। उन्होंने नई दिल्ली सीट से आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को हराया, जो कि भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण जीत मानी जा रही है। यह सीट हमेशा से मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के लिए एक महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। परवेश वर्मा की राजनीतिक छवि काफी मजबूत है और उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी है। इसके साथ ही, दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ताओं में भी उनकी स्वीकार्यता है। उनका नाम पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में सबसे ऊपर है।
2. मनजिंदर सिंह सिरसा:
दिल्ली भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजौरी गार्डन सीट से जीतने वाले मनजिंदर सिंह सिरसा का नाम भी मुख्यमंत्री पद के लिए संभावित दावेदारों में शामिल किया जा रहा है। सिरसा की लोकप्रियता सिख समुदाय के बीच विशेष रूप से अधिक है और उन्होंने दिल्ली की सिख राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे हमेशा से पार्टी में एक मजबूत और विवादों से परे नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं। उनकी प्रबंधन क्षमता और पार्टी के भीतर मजबूत समर्थन उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाती है।
3. मोहन सिंह बिष्ट:
दिल्ली भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मोहन सिंह बिष्ट का नाम भी मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुखता से लिया जा रहा है। बिष्ट ने हमेशा पार्टी के लिए मेहनत की है और उनके पास दिल्ली के विकास के मुद्दों पर गहरी समझ है। उनका राजनीतिक अनुभव और पार्टी में स्थापित स्थिति उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है। हालांकि, उनका नाम उन नेताओं के मुकाबले थोड़ी कम चर्चा में है जो दिल्ली विधानसभा में अधिक सक्रिय हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता उन्हें एक प्रमुख उम्मीदवार के रूप में स्थापित करती है।
4. विक्रम मित्तल:
विक्रम मित्तल, जो दिल्ली भाजपा के एक और युवा चेहरा माने जाते हैं, का नाम भी कुछ हलकों में उठ रहा है। उन्होंने दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में भाजपा की स्थिति मजबूत करने के लिए काफी काम किया है। हालांकि उनका नाम ज्यादा सार्वजनिक नहीं हुआ, लेकिन पार्टी के भीतर उनकी छवि एक ईमानदार और मेहनती नेता के रूप में बन चुकी है।
भाजपा नेतृत्व का रुख
भा.ज.पा. के दिल्ली अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री का चुनाव पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा किया जाएगा। उनका कहना था, “इस फैसले का अधिकार केवल पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के पास है।” इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि विधायक दल की बैठक में यह तय किया जाएगा कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री पद का चुनाव कैसे होगा
सूत्रों के अनुसार, भाजपा केंद्रीय नेतृत्व द्वारा 15 फरवरी के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 फरवरी को अपने फ्रांस और अमेरिका दौरे से लौटेंगे और इसके बाद भाजपा विधायक दल की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर चर्चा की जाएगी।
भाजपा की रणनीति
दिल्ली में भाजपा ने जो जीत हासिल की है, वह पार्टी के लिए काफी मायने रखती है। हालांकि, दिल्ली में भाजपा के पास विधानसभा में बहुमत है, लेकिन मुख्यमंत्री पद के चुनाव के दौरान पार्टी नेतृत्व को दिल्ली के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक समूहों को ध्यान में रखते हुए अपना उम्मीदवार चुनना होगा। दिल्ली की राजनीति में सिख समुदाय, पंजाबी और अन्य समुदायों का महत्वपूर्ण स्थान है, और इसलिए पार्टी के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण होगा।