मुंबई. GBS Virus News: मुंबई में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या तीन तक पहुँच गई है। हाल ही में, 13 साल की एक लड़की में इस सिंड्रोम के होने की पुष्टि हुई, जो अब तक की सबसे कम उम्र की जीबीएस मरीज है। बॉम्बे नगर निगम (BMC) की कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दक्षा शाह ने बताया कि लड़की को बीएमसी द्वारा संचालित नायर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, और उसकी स्थिति अब स्थिर है। चिकित्सकों का मानना है कि लड़की को शाम तक छुट्टी मिल सकती है।
इससे पहले, मुंबई में 64 वर्षीय महिला में भी इस सिंड्रोम का पता चला था। 10 फरवरी को इस वायरस के कारण पहली मौत दर्ज की गई। मृतक की पहचान सुभाष डेटे के रूप में हुई, जिनका नायर अस्पताल में निधन हो गया।
क्या है गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस)?
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) एक दुर्लभ और गंभीर तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारी है, जो शरीर के इम्यून सिस्टम के द्वारा नसों पर हमला करने के कारण होती है। यह बीमारी आमतौर पर एक वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के बाद विकसित होती है, जैसे कि फ्लू या गले में संक्रमण। जीबीएस के लक्षणों में कमजोरी, तंत्रिका तंत्र की समस्याएँ, हाथों और पैरों में झुनझुनी और शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द शामिल हैं।
यह वायरस तंत्रिका तंत्र में सूजन और नुकसान का कारण बनता है, जिससे मांसपेशियों की कमजोरी और पैरेलिसिस जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। गंभीर मामलों में, यह सांस लेने में दिक्कत भी पैदा कर सकता है। जीबीएस का इलाज समय पर किया जाए तो मरीज ठीक हो सकते हैं, लेकिन इसमें देरी होने से स्थिति गंभीर हो सकती है।
मुंबई में जीबीएस वायरस से संबंधित चिंता
मुंबई में जीबीएस वायरस के बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग में चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस वायरस के फैलने की गति को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मरीजों को जल्द से जल्द इलाज प्रदान किया जा रहा है, और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
