
चंडीगढ़. Harayana News: कांग्रेस सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने शुक्रवार को हरियाणा सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि राज्य के अफसर मुख्यमंत्री नायब सैनी की नहीं सुनते, वहीं मुख्यमंत्री मंत्रियों की भी नहीं सुनते। उन्होंने कहा कि राज्य में अफसरशाही इतनी मजबूत हो गई है कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पास निर्णय लेने की असल शक्ति नहीं है, और प्रशासन पर उनकी पकड़ कमजोर हो गई है।
हुड्डा ने राज्य के परिवहन मंत्री अनिल विज के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अफसरों की कार्यशैली में उदासीनता साफ तौर पर देखी जा रही है। उनके अनुसार, अफसरों को यह पूरा यकीन है कि राज्य की असली सत्ता की डोर कहीं और है, और यही वजह है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग और अन्य प्रशासनिक निर्णय कहीं और से हो रहे हैं। यह स्थिति अब खुद प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर रहे हैं। विज जैसे मंत्री इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि अफसरों की लापरवाही के कारण जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवालिया निशान
दीपेन्द्र हुड्डा ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “जो मुख्यमंत्री अपने दफ्तर में अपनी मर्जी का स्टाफ नियुक्त नहीं कर सकता, वह प्रशासन पर कैसे नियंत्रण रख सकता है?” हुड्डा का आरोप है कि मुख्यमंत्री की नीतियों और उनके निर्देशों की अनदेखी कर अफसर अपनी मनमानी करते हैं, जिससे प्रशासनिक ढांचा कमजोर पड़ा है।
भा.ज.पा. सरकार पर गंभीर आरोप
हुड्डा ने भाजपा सरकार के कामकाज पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि भा.ज.पा. सरकार ने सत्ता में आने के बाद 100 दिन पूरे कर लिए हैं, लेकिन सरकार ने जनता से किए गए अपने किसी भी वादे को पूरा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने एक भी काम ऐसा नहीं किया जिसे वे जनता के सामने प्रस्तुत कर सकें और गर्व महसूस कर सकें।
सत्ता हासिल करने के तरीके पर सवाल
कांग्रेस नेता ने भाजपा सरकार के सत्ता में आने के तरीके पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता हासिल करने के लिए “साम, दाम, दंड, भेद, तंत्र-मंत्र, जाति-धर्म, दुष्प्रचार, और झूठ” का सहारा लिया है। उनका कहना था कि भाजपा ने काम के आधार पर नहीं, बल्कि इन सब तरीकों से अपनी राजनीतिक जमीन बनाई और सत्ता पर काबिज हुई।
आखिरकार, क्या है भाजपा का सच?
दीपेन्द्र हुड्डा ने यह स्पष्ट कर दिया कि भाजपा का शासन अब तक कोई वास्तविक बदलाव या सुधार लेकर नहीं आया है। जनता को भाजपा सरकार से जो उम्मीदें थीं, वे पूरी नहीं हो सकी हैं। हुड्डा ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों को सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक सशक्त प्रशासन की जरूरत है, जो न केवल अफसरशाही पर नियंत्रण रखे, बल्कि लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान कर सके।
प्रमुख बिंदु:
- अफसरशाही की अनदेखी: अफसर मुख्यमंत्री की नहीं सुनते और मुख्यमंत्री मंत्रियों की नहीं सुनते, जो प्रशासन में अव्यवस्था का कारण है।
- ट्रांसफर-पोस्टिंग के मुद्दे पर बयान: अफसरों को पता है कि असली सत्ता कहीं और है, जिसकी वजह से वे सरकार के निर्देशों की अनदेखी करते हैं।
- भा.ज.पा. के कामकाज पर सवाल: भाजपा सरकार ने 100 दिन पूरे होने के बावजूद कोई भी वादा पूरा नहीं किया।
- भा.ज.पा. की सत्ता हासिल करने की शैली: साम, दाम, दंड, भेद, तंत्र-मंत्र और झूठ के आधार पर सत्ता हासिल करने का आरोप।
