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Hemant Soren: चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, जानिए उनकी सियासी यात्रा और संघर्ष

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Hemant Soren
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झारखंड. Hemant Soren:  हेमंत सोरेन एक बार फिर झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 के परिणामों के बाद गुरुवार (28 नवंबर) को हेमंत सोरेन चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। उनके नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने शानदार जीत हासिल की है। यह उनके सियासी सफर का एक और महत्वपूर्ण मोड़ है, जिसमें उन्होंने कई मुश्किलों का सामना किया, संघर्षों के बावजूद राजनीति में अपनी जगह बनाई और राज्य की राजनीति में एक मजबूत पहचान बनाई।
सियासी सफर की शुरुआत और पहली हार
हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर किसी चुनौती से कम नहीं रहा। उनका जन्म 10 अगस्त 1975 को झारखंड के दुमका जिले में हुआ था। उनके पिता शिबू सोरेन ने झारखंड के आदिवासी अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया था, जो हेमंत के लिए प्रेरणा बना। हालांकि, हेमंत की शिक्षा पर ज्यादा ध्यान नहीं गया। उन्होंने रांची के बीआईटी (मेसरा) में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, लेकिन शिक्षा पूरी करने से पहले ही उन्होंने इसे छोड़ दिया। राजनीति में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने 2005 में की, जब उन्होंने दुमका से अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह चुनाव हार गए। फिर भी, यह उनकी यात्रा का पहला कदम था।
2009 में विधायक और राज्यसभा सदस्य
हेमंत सोरेन ने 2009 में अपना राजनीतिक भाग्य बदला। इस बार, वे झारखंड विधानसभा चुनाव में दुमका सीट से विजयी हुए और विधायक बने। इसके बाद, उन्होंने अपनी राज्यसभा सदस्यता छोड़ दी और झारखंड विधानसभा में अपनी जगह बनाई। इसी दौरान उनकी राजनीति में एक नया मोड़ आया, और उन्हें उपमुख्यमंत्री बनने का मौका मिला।
उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री का सफर
हेमंत सोरेन ने 2010 में झारखंड के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। इस पद पर रहते हुए उन्होंने राज्य में विकास कार्यों और आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की। 2013 में उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली शपथ ली, हालांकि उनका पहला कार्यकाल मात्र 17 महीने का था।
मुश्किलों का सामना और संघर्ष
हेमंत सोरेन के सियासी जीवन में संघर्षों की कमी नहीं रही। 2014 के विधानसभा चुनाव में झामुमो को हार का सामना करना पड़ा और भाजपा ने राज्य में सरकार बनाई। बावजूद इसके, हेमंत सोरेन ने बरहेट सीट से चुनाव जीतने में सफलता पाई और उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने का अवसर मिला। साल 2019 में जब झारखंड विधानसभा चुनाव हुए, तो हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो ने कांग्रेस और राजद के साथ गठबंधन करके भारी जीत हासिल की। 29 दिसंबर 2019 को उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
विवाद और गिरफ्तारी
हालांकि, हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर हमेशा आसान नहीं रहा। जनवरी 2023 में, ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने उन्हें जमीन घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया, जिसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। लेकिन हेमंत सोरेन ने हार नहीं मानी और जेल से बाहर आने के बाद, जुलाई 2023 में एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
अब चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की तैयारी
विधानसभा चुनाव 2024 के परिणामों में हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एक बार फिर शानदार जीत हासिल की है। अब 28 नवंबर को वह चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। इस बार उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने गांडेय विधानसभा सीट से जीत हासिल की है, जो एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव का संकेत देता है।
हेमंत सोरेन का भविष्य
हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर बहुत ही प्रेरणादायक रहा है। उनकी संघर्षमयी यात्रा ने उन्हें झारखंड के सबसे प्रमुख नेता के रूप में स्थापित किया है। अब जब वह चौथी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, तो यह देखा जाएगा कि वे राज्य के विकास के लिए कौन-कौन से नए कदम उठाते हैं और अपने कार्यकाल को कैसे सफल बनाते हैं। सियासी सफलता के साथ-साथ उन्होंने यह भी साबित किया है कि उनका दृढ़ नायकत्व, संघर्ष और नेतृत्व क्षमता झारखंड की राजनीति में एक अलग पहचान बना चुके हैं।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
हेमंत सोरेन का जन्म 10 अगस्त 1975 को झारखंड के दुमका जिले के इटखोरी गांव में हुआ था। उनके पिता शिबू सोरेन, जो झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक थे, ने आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए कई दशक लंबा संघर्ष किया। इस संघर्ष ने हेमंत को सियासी दृष्टि से प्रभावित किया। हेमंत ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना के एमजी हाई स्कूल और पटना हाई स्कूल से प्राप्त की। बाद में, उन्होंने रांची के बीआईटी मेसरा में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, लेकिन विभिन्न कारणों से उन्होंने अपनी पढ़ाई को बीच में ही छोड़ दिया। शिक्षा में औपचारिक रूप से पूरी तरह से असफल रहने के बावजूद, हेमंत ने राजनीति में अपनी पैठ बना ली।

हेमंत सोरेन का नेतृत्व और विचारधारा
हेमंत सोरेन ने हमेशा झारखंड के आदिवासी और मूलवासी समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को प्राथमिकता दी है। उनकी सरकार ने आदिवासी समुदाय के लिए कई योजनाएं बनाई हैं, जिसमें उनके जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में काम किया गया है।
साथ ही, हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड ने नवीनतम तकनीक और इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी सुधार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उनका लक्ष्य झारखंड को एक मजबूत और समृद्ध राज्य बनाना है, जो आदिवासी संस्कृति और परंपरा को भी बनाए रखते हुए आर्थिक विकास की ओर बढ़े।
विवाद और आलोचनाएं
हेमंत सोरेन के राजनीतिक जीवन में कई विवाद भी रहे हैं। विशेष रूप से उनके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं कि वह आदिवासी अधिकारों के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। इसके अलावा, उनके नेतृत्व में कई बार पार्टी और गठबंधन में विभाजन की खबरें भी आईं। लेकिन इन विवादों के बावजूद हेमंत सोरेन ने अपनी पहचान बनाए रखी है।
Bharat Update 9
Author: Bharat Update 9

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