अलवर. Sariska Tiger Reserve: राजस्थान के अलवर जिले स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों के बढ़ते मूवमेंट और उनके सुरक्षित आवास के लिए क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच) की सीमाओं के पुनर्निर्धारण पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सरिस्का टाइगर रिजर्व के निदेशक संग्राम सिंह कटियार की अध्यक्षता में केंद्रीय एंपावर्ड कमेटी ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए बाघों के नए निवास क्षेत्र पर विस्तार से चर्चा की।
क्या हुआ बैठक में?
उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर राजस्थान सरकार के वन विभाग द्वारा 10 जनवरी को एक समिति का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य सरिस्का में बाघों के प्राकृतिक आवास को बढ़ाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इस बैठक में बाघ परियोजना के अधिकारियों के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण वन्यजीव विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक में बाघों के बढ़ते मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए सरिस्का के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के दायरे में विस्तार करने का प्रस्ताव रखा गया।
बैठक में शामिल अधिकारी और विचार-विमर्श
बैठक में सरिस्का के उपवन संरक्षक अभिमन्यु सहारण ने बताया कि समिति वैज्ञानिक मापदंडों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी। इस रिपोर्ट को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38-वी के तहत प्रस्तुत किया जाएगा। बैठक में विभिन्न अधिकारियों और विशेषज्ञों ने बाघों के लिए सुरक्षित आवास क्षेत्र के पुनर्निर्धारण के संबंध में अपने सुझाव साझा किए, जिन पर आगामी बैठक में और चर्चा की जाएगी।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
- संग्राम सिंह कटियार, निदेशक, सरिस्का टाइगर रिजर्व
- अभिमन्यु सहारण, उपवन संरक्षक, सरिस्का
- अतिरिक्त जिला कलक्टर, अलवर
- वन्यजीव विशेषज्ञ
- उपखण्ड अधिकारी, बानसूर और नारायणपुर
- सहायक वन संरक्षक, अकबरपुर, सरिस्का
आगे की प्रक्रिया और समयसीमा
बैठक में यह तय किया गया कि आने वाले सुझावों पर और चर्चा के बाद सरिस्का प्रशासन एक नया ड्राफ्ट तैयार करेगा, जिसे 30 अप्रैल तक राजस्थान सरकार को भेजा जाएगा। इस ड्राफ्ट में बाघों के लिए एक विस्तारित और संरक्षित आवास क्षेत्र का प्रस्ताव होगा, जो उनके सुरक्षित निवास और संरक्षण में सहायक होगा। सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों के सुरक्षित आवास के लिए चल रहा यह पुनर्निर्धारण कार्य बाघों के संरक्षण के दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रक्रिया में विभिन्न सरकारी विभागों और वन्यजीव विशेषज्ञों के बीच सहयोग और समन्वय से बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
