
नई दिल्ली. Indian poltics: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र की आलोचना की है। प्रधान ने यह दावा किया कि स्टालिन का पत्र राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रेरित है और इसमें “कल्पनात्मक चिंताओं” का उल्लेख किया गया है, जो पूरी तरह से राजनीतिक स्वार्थ के तहत लिखी गई हैं। प्रधान ने इस पत्र को सही इरादों से नहीं लिखा गया और राज्य के शिक्षा संबंधी मुद्दों को राजनीतिक रूप से उठाया गया बताया।
प्रधान ने कहा, “मैंने सोशल मीडिया के माध्यम से जाना कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। लेकिन, यह पत्र अच्छे उद्देश्य से नहीं लिखा गया है। इसमें कई काल्पनिक चिंताएँ व्यक्त की गई हैं, जो पूरी तरह से राजनीतिक प्रेरणा से भरी हुई हैं। मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए इसे लिखा है, न कि राज्य के छात्रों या शिक्षा के भविष्य को ध्यान में रखते हुए।”
प्रधान ने आगे यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उद्देश्य भारतीय शिक्षा को वैश्विक स्तर तक पहुंचाना है, साथ ही यह भारतीय सांस्कृतिक और भाषाई धरोहर को भी संरक्षित और बढ़ावा देने की दिशा में काम करता है। उन्होंने NEP के तहत तमिलनाडु जैसी विविधता से भरी राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की बात की और यह भी बताया कि केंद्र सरकार तमिल सहित 13 प्रमुख भारतीय भाषाओं में प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन कर रही है।
प्रधान ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “यह पूरी तरह अनुचित है कि कोई राज्य NEP 2020 को संकीर्ण दृष्टिकोण से देखे और इसके बारे में राजनीतिक नारों के माध्यम से धमकी देने की कोशिश करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार तमिल संस्कृति और भाषा को वैश्विक मंच पर प्रचारित और बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मैं निवेदन करता हूं कि शिक्षा को राजनीति का हिस्सा न बनाएं और हमारे छात्रों के सर्वोत्तम हित में राजनीति से ऊपर उठें।”
प्रधान ने आगे यह भी स्पष्ट किया कि NEP का उद्देश्य सिर्फ शिक्षा के स्तर को वैश्विक मानकों तक लाना नहीं है, बल्कि इसे भारतीय सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़े रखना है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार तमिल सहित 13 प्रमुख भाषाओं में प्रवेश परीक्षाएं आयोजित कर रही है, ताकि सभी राज्यों की भाषाओं को समुचित स्थान मिल सके।
प्रधान ने प्रधानमंत्री मोदी के तमिलनाडु के लिए किए गए योगदान का उल्लेख करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने सिंगापुर में भारत के पहले थिरुवल्लुर सांस्कृतिक केंद्र की घोषणा की थी, जो तमिल विचारधारा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का एक बड़ा कदम है। यह हमारे समर्पण को दिखाता है। 1968 से, विभिन्न सरकारों ने शिक्षा क्षेत्र में भाषा नीति लागू की है, और अब अगर NEP 2020 को लागू नहीं किया जाता है, तो हम छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को वैश्विक अवसरों से वंचित कर देंगे।”
धर्मेन्द्र प्रधान ने यह भी कहा कि कई राज्य जो बीजेपी के नियंत्रण में नहीं हैं, वे भी NEP को लागू कर रहे हैं और केंद्र सरकार से पूरा सहयोग प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा को राजनीति से अलग रखने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि यह छात्रों के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह विवाद उस पत्र के बाद उत्पन्न हुआ, जिसे मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा था, जिसमें उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा की गई उस टिप्पणी का विरोध किया था, जिसमें कहा गया था कि यदि तमिलनाडु तीन भाषा नीति को लागू नहीं करता है, तो राज्य को केंद्र से शिक्षा क्षेत्र के लिए निर्धारित फंड नहीं दिए जाएंगे।
स्टालिन के पत्र में, उन्होंने प्रधानमंत्री से ‘समग्र शिक्षा’ फंड्स जारी करने की मांग की थी। इस पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा था कि तमिलनाडु के ‘समग्र शिक्षा’ फंड्स तब तक जारी नहीं होंगे जब तक राज्य NEP 2020 की तीन भाषा नीति को लागू नहीं करता।
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र के फैसले पर बार-बार आपत्ति जताई है, विशेष रूप से हिंदी भाषा के लागू करने को लेकर। DMK सरकार का कहना है कि केंद्र तमिलनाडु पर हिंदी थोपने का प्रयास कर रहा है और इस वजह से फंड्स जारी नहीं किए जा रहे हैं।
इस पत्र का आदान-प्रदान इस बात का संकेत है कि तमिलनाडु और केंद्र के बीच NEP 2020 को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं, और यह मामला एक बड़ा राजनीतिक विवाद बनता जा रहा है। जहां एक ओर केंद्र सरकार ने NEP को भारतीय शिक्षा के भविष्य के लिए आवश्यक बताया है, वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु सरकार इसे राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई स्वायत्तता पर हमला मान रही है।
