
नई दिल्ली. Indian Railway Good News: भारतीय रेलवे में नरेंद्र मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद से एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। 100 प्रतिशत ट्रैक विद्युतीकरण से लेकर स्टेशन की पूरी नवीनीकरण तक, रेलवे क्षेत्र में पिछले दशक में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। मोदी सरकार ने वंदे भारत जैसी ट्रेनों को पेश किया, जो यात्रियों की सुविधा और यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाने में मददगार साबित हुईं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत की पहली सुपरफास्ट ट्रेन का नाम क्या है, जो 1930 से चल रही है?
यह ट्रेन है ‘दक्कन क्वीन'(Deccan Queen), जो भारतीय रेलवे में कई ऐतिहासिक पहले के रूप में जानी जाती है—यह देश की पहली सुपरफास्ट ट्रेन है, पहली लंबी दूरी की ट्रेन जो इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव द्वारा संचालित हुई, पहली वेस्टिब्यूल ट्रेन, पहली ट्रेन जिसमें “महिला-शठ्ठद्य4” कोच था, और पहली ट्रेन जिसमें विशेष डाइनिंग कार का संचालन हुआ।
दक्कन क्वीन के बारे में सब कुछ
- लॉन्च की तारीख: दक्कन क्वीन को 1 जून 1930 को चलाया गया था।
- नाम का इतिहास: दक्कन क्वीन का नाम पुणे के लोकप्रिय उपनाम “दक्कन की रानी” के नाम पर रखा गया, जो पुणे के लिए प्रसिद्ध है।
- 90वीं वर्षगांठ: दक्कन क्वीन ने 1 जून 2019 को अपनी 90वीं वर्षगांठ मनाई।
- सुपरफास्ट ट्रेन: यह ट्रेन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और पुणे जंक्शन के बीच सबसे तेज़ सेवा प्रदान करती है।
- गति: दक्कन क्वीन की औसत गति 60 किमी/घंटा (37 मील प्रति घंटा) है, जिसमें स्टॉप शामिल हैं, और इसकी अधिकतम गति 105 किमी/घंटा (65 मील प्रति घंटा) है।
- विशेष उत्सव: दक्कन क्वीन वह अकेली ट्रेन है, जिसका जन्म हर साल रेल यात्रियों, रेलप्रेमियों और रेलवे अधिकारियों द्वारा मनाया जाता है।
- लोकोमोटिव: दक्कन क्वीन को जून 2022 तक कल्याण स्थित ङ्खष्ट्ररू-3 लोकोमोटिव द्वारा चलाया जाता था।
- प्रारंभिक यात्रा: दक्कन क्वीन की पहली सेवा कल्याण (अब कल्याण) और पुणे के बीच शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य अमीर यात्रियों को मुंबई (अब मुंबई) से पुणे तक घोड़ा दौड़ देखने के लिए ले जाना था।
- नवीनतम बदलाव: 19 अगस्त 2020 को केंद्रीय रेलवे ने दक्कन क्वीन को नए रु॥क्च कोच प्रदान करने की घोषणा की, साथ ही सभी कोचों पर एक विशेष सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण “हरी-भूरी-पीली” घुमावदार पट्टी लिवरी का परिचय भी दिया।
- दक्कन क्वीन का खास जश्न: हर साल 1 जून को दक्कन क्वीन के नियमित पास धारक, रेलप्रेमी और रेलवे अधिकारी मिलकर इस ऐतिहासिक ट्रेन का जन्मदिन मनाते हैं। यह एक अद्भुत और उत्साहजनक परंपरा बन चुकी है, जो रेलवे के प्रति प्रेम और इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाती है।
दक्कन क्वीन न केवल भारतीय रेलवे के इतिहास का हिस्सा है, बल्कि यह भारतीय रेल यात्रा की एक पहचान भी बन चुकी है।
