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Jharkhand Election 2024: झारखंड चुनाव 2024: ‘टाइगर’ की धमाकेदार एंट्री, सियासी रण में हलचल!, टेंशन में BJP-Congress-JMM

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Jharkhand Election
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झारखंड.Jharkhand Election 2024: आगामी झारखंड विधानसभा चुनाव में एक नई सियासी ताकत की एंट्री हो रही है—जयराम महतो उर्फ़ ‘टाइगर’ की पार्टी, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम)। इस युवा नेता की सियासी धाक ने राज्य के दोनों प्रमुख गठबंधनों, इंडिया और एनडीए को चिंता में डाल दिया है। खासकर, जयराम के नेतृत्व में खड़ी हो रही इस क्षेत्रीय पार्टी के तेवर और युवाओं का बढ़ता समर्थन सियासी समीकरणों को पलटने की ताकत रखते हैं।
‘टाइगर’ का बढ़ता प्रभाव
30 साल के जयराम महतो की रैलियों में उमड़ रही युवाओं की भीड़ यह साबित करती है कि उनकी पार्टी को क्षेत्रीय स्तर पर एक जबरदस्त पहचान मिल रही है। खासकर, कुर्मी (महतो) समुदाय के बीच उनका प्रभाव तेजी से बढ़ा है, जो राज्य की 30 विधानसभा सीटों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। टाइगर की बात करें तो वह खुद दो सीटों—गिरिडीह जिले की डूमरी सीट और एक अन्य—से चुनावी मैदान में हैं, जहां वह सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की मंत्री बेबी देवी को कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
क्या बिगाड़ेगा ‘टाइगर’ चुनावी समीकरण?
जेएलकेएम ने 76 उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है, और इस पार्टी ने अपने कुछ उम्मीदवारों को इंडिया ब्लॉक के समर्थन में खड़ा कर दिया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह नई पार्टी झारखंड के राजनीतिक समीकरणों को चकरघिन्नी बना देगी? खासकर, एनडीए और इंडिया के गठबंधनों में बिखराव का खतरा मोल लिया जा सकता है, क्योंकि इस पार्टी का समर्थन खासकर युवाओं और स्थानीय मुद्दों से प्रभावित लोगों के बीच तेजी से बढ़ा है।
‘टाइगर’ के समर्थकों की धड़कन
गिरिडीह के डूमरी कस्बे में तो ‘टाइगर’ की ताकत साफ़ नजर आ रही है। स्थानीय मेडिकल स्टोर चलाने वाले पीयूष मिश्रा कहते हैं, “यहां तो बस ‘टाइगर’ का ही माहौल है। युवा उनके साथ हैं, और एनडीए के प्रचार का नामो-निशान तक नहीं दिखता।” वहीं, तरनारी गांव के दरमेश महतो का कहना है, “हमने पिछली बार झामुमो का समर्थन किया था, लेकिन इस बार ‘टाइगर’ ही जीतेंगे, क्योंकि भर्ती परीक्षाओं में घोटालों के खिलाफ उनकी आवाज ने हमें झकझोर दिया है।”
‘टाइगर’ की राजनीति की जड़ें
जयराम महतो की लोकप्रियता के पीछे उनकी तगड़ी क्षेत्रीय आवाज़ है। 2022 में उन्होंने स्थानीय लोगों के रोजगार और क्षेत्रीय भाषाओं की लड़ाई को लेकर जमकर आंदोलन किया था। झारखंडी भाषा खातियां संघर्ष समिति (जेबीकेएसएस) का नेतृत्व करते हुए उन्होंने झारखंड के बाहर की भाषाओं- जैसे भोजपुरी, मगही, और अंगिका के खिलाफ मोर्चा खोला। उनकी संघर्षशील छवि ने उन्हें युवा वर्ग के बीच ‘टाइगर’ के नाम से मशहूर कर दिया।
सियासी फलक पर तेजी से उभरते ‘टाइगर’
लोकसभा चुनाव 2019 में जयराम महतो ने गिरिडीह सीट से 3.5 लाख वोट हासिल किए थे, और इसी दौरान उन्होंने डूमरी विधानसभा क्षेत्र में भी अपने प्रभाव का परिचय दिया था। जेपीएलकेएम के प्रत्याशियों के लिए यह विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
Bharat Update 9
Author: Bharat Update 9

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