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Omprakash Chautala: हरियाणा का वह कांड, जिसने ओपी चौटाला से छीन लिया मुख्यमंत्री पद, जानें पूरी कहानी

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Omprakash Chautala
Omprakash Chautala: The Haryana scandal that took away the Chief Minister’s post from OP Chautala, know the whole story
रोहतक. Omprakash Chautala:  हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला का शुक्रवार को गुरुग्राम में निधन हो गया। 89 वर्षीय ओपी चौटाला ने पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की। पहली बार वे 2 दिसंबर 1989 को मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन मात्र एक महीने बाद ही उन्हें इस पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके पीछे था हरियाणा का एक शर्मनाक कांड, जिसने ओपी चौटाला की मुख्यमंत्री कुर्सी को हिला दिया। जानिए वही कांड, जिसकी वजह से ओपी चौटाला को सीएम पद से हाथ धोना पड़ा।
पिता बने डिप्टी पीएम, बेटे को मिला सीएम का पद
यह कहानी 1989 की है, जब वीपी सिंह की सरकार बनी और उस दौरान देवी लाल को देश के उप प्रधानमंत्री का पद मिला। ऐसे में देवी लाल ने अपने बड़े बेटे ओम प्रकाश चौटाला को हरियाणा का मुख्यमंत्री बना दिया। हालांकि, ओपी चौटाला विधानसभा के सदस्य नहीं थे, इसलिए उन्हें सीएम बनने के बाद छह महीने के भीतर चुनाव जीतना था।
महम कांड: मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे तक की कहानी
1989 में महम सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें ओम प्रकाश चौटाला को उम्मीदवार बनाया गया। लेकिन महम की खाप ने चौटाला का कड़ा विरोध किया और वहां के एक स्थानीय नेता आनंद सिंह दांगी को मैदान में उतार दिया। चुनाव में चौटाला ने अपने बेटे अभय चौटाला को जिम्मेदारी दी।
27 फरवरी 1990 को हुए इस उपचुनाव में हिंसा की जबरदस्त लहर उठी। कई जगहों पर बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगे। खासकर गांव बैंसी में मतदान केंद्र पर जब अभय चौटाला और उनके साथियों ने बूथ कैप्चरिंग की कोशिश की, तो दांगी समर्थकों ने स्कूल को घेर लिया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलीबारी की, जिससे 20 लोगों की मौत हो गई।
एक सिपाही की कुर्बानी और अभय की जान बचाना
घटनास्थल पर जो हुआ वह और भी दिल दहला देने वाला था। अभय चौटाला को दांगी समर्थकों से बचाने के लिए ओपी चौटाला ने एक योजना बनाई। एक पुलिसकर्मी ने अभय चौटाला के कपड़े पहने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन जब भीड़ ने सिपाही को देखा, तो वह उसे अभय समझ कर मार डाला। हालांकि, अभय को सुरक्षित बचा लिया गया।
केंद्र सरकार का दबाव और ओपी चौटाला का इस्तीफा
महम कांड के बाद केंद्र सरकार पर ओम प्रकाश चौटाला को मुख्यमंत्री पद से हटाने का दबाव बढ़ने लगा। वीपी सिंह की सरकार ने घोषणा की कि ओपी चौटाला को महम से चुनाव जीतने के बाद ही मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का अधिकार मिलेगा। इस दबाव के चलते ओपी चौटाला को 22 मई 1990 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। यह कांड हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में एक काले धब्बे के रूप में याद किया जाता है, जिसने न सिर्फ एक मुख्यमंत्री की कुर्सी छीनी, बल्कि राज्य में राजनीतिक और सामाजिक तनाव को भी जन्म दिया।
Bharat Update 9
Author: Bharat Update 9

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