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PM Modi- Mohan Bhagwat: 11 साल बाद देखने को मिला ऐतिहासिक पल, पीएम मोदी और मोहन भागवत मुलाकात, इतने साल क्यां रही दूरी?

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PM MODI-MOHAN BHAGWAT
PM MODI-MOHAN BHAGWAT

नई दिल्ली. PM Modi- Mohan Bhagwat:  30 मार्च 2025 को नागपुर में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत एक ही मंच पर साथ नजर आए। यह मुलाकात खास थी, क्योंकि यह दोनों नेताओं की राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा (22 जनवरी 2024) के बाद पहली सार्वजनिक मुलाकात थी और आरएसएस मुख्यालय में उनकी पहली संयुक्त उपस्थिति थी। वहीं, 10 मई 2014 को दिल्ली में दोनों की आखिरी एकांत मुलाकात हुई थी। यह लंबा अंतराल सवालों को जन्म देता है, कि आखिर इतने सालों तक दोनों नेताओं के बीच मुलाकात क्यों नहीं हो पाई?

राम मंदिर के बाद एक नई शुरुआत

22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद यह पहला मौका था जब नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत एक साथ किसी सार्वजनिक मंच पर दिखाई दिए। इस आयोजन में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, आचार्य गोविंद गिरी महाराज, अवधेशानंद महाराज और नागपुर के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले भी मौजूद थे। इस मुलाकात को बीजेपी और आरएसएस के बीच एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है, खासकर तब जब हाल ही में दोनों के रिश्तों में तनाव की खबरें आ रही थीं।

2014 से 2025: 11 सालों का अंतराल

मोदी और भागवत की आखिरी एकांत मुलाकात 10 मई 2014 को दिल्ली में हुई थी, जब लोकसभा चुनाव की तैयारी चल रही थी। उस समय मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे और भागवत आरएसएस के सरसंघचालक। इसके बाद कई बार मुलाकात की संभावना बनी, लेकिन कभी भी यह संभव नहीं हो पाई। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह दूरी दोनों संगठनों के बीच वैचारिक और रणनीतिक मतभेदों का परिणाम थी। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद आरएसएस ने बीजेपी की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए थे, जहां मोहन भागवत ने ‘अहंकार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था, जो सीधे तौर पर मोदी के नेतृत्व पर टिप्पणी मानी गई।

बीजेपी और आरएसएस के रिश्तों में उतार-चढ़ाव

हाल के सालों में बीजेपी और आरएसएस के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव आए। 2024 के चुनावों में बीजेपी को पूर्ण बहुमत न मिलने के बाद आरएसएस ने पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाए। आरएसएस के मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ में रतन शारदा ने एक लेख में कहा कि 543 सीटों पर सिर्फ मोदी के नाम पर चुनाव लडऩा ‘आत्मघाती’ साबित हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी नेता ‘मोदी की चमक’ में खोए रहे और जमीनी आवाजों को नजरअंदाज किया। साथ ही, आरएसएस ने बीजेपी के संसदीय दल की बैठक न बुलाने पर भी नाराजगी जताई थी, जिससे दोनों के बीच दूरियां साफ तौर पर दिखने लगीं।

आगे का रास्ता: एकजुटता या नई चुनौतियां?

हालांकि, यह मुलाकात बीजेपी और आरएसएस के बीच एकजुटता का संकेत दे रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह दोनों संगठनों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को खत्म कर पाएगी? कई राज्यों में, जैसे बंगाल, बिहार, कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बीजेपी के अंदर मतभेद साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं। इस लिहाज से यह मुलाकात एक नई शुरुआत हो सकती है। यह मुलाकात केवल बीजेपी और आरएसएस के रिश्तों को एक नई दिशा देने का नहीं, बल्कि यह साबित करने का भी मौका है कि दोनों संगठन एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।

Bharat Update 9
Author: Bharat Update 9

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