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Rajasthan News: MPUAT की नई उपलब्धि: ज्वार की नई किस्म ‘प्रताप ज्वार 2510’ भारत सरकार द्वारा अधिसूचित

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Pratap Jowar 2510
Pratap Jowar 2510

उदयपुर.Rajasthan News: महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए ज्वार की नई किस्म ‘प्रताप ज्वार 2510’ विकसित की है, जिसे भारत सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है। यह नई किस्म राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी क्षेत्र में ज्वार की खेती के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

ज्वार की नई किस्म की विशेषताएं

  • मध्यम अवधि में पकने वाली किस्म (105-110 दिन)
  • 40-45 क्विंटल प्रति हैक्टेयर दाने की उपज
  • 130-135 क्विंटल प्रति हैक्टेयर सूखे चारे की उपज
  • एन्थ्रेकनोज, जोनेट, मोल्ड रोगों एवं तना मक्खी तथा तना छेदक कीटों के लिए सामान्य प्रतिरोधी
Pratap Jowar 2510
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विश्वविद्यालय के कुलपति का बयान

डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक, कुलपति, महाराणा प्रताप कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने बताया कि ज्वार एक ग्लुटेन मुक्त अनाज होता है और इसका उपयोग दलिया, ब्रेड और केक आदि बनाने में किया जाता है। ज्वार के दाने का उपयोग खाद्य तेल, स्टार्च, डेक्सट्रोज आदि के लिए भी किया जाता है। उन्होंने कहा कि विगत वर्ष 2023 अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष के रूप में मनाया गया, जिससे ज्वार के दानों में पोषक गुणों के बारे में आमजन में जागृति आयी है।

वैज्ञानिकों का योगदान

अखिल भारतीय ज्वार अनुसंधान परियोजना के वैज्ञानिकों ने इस नई किस्म को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। डॉ. अरविंद वर्मा, निदेशक अनुसंधान, और डॉ. हेमलता शर्मा, परियोजना प्रभारी ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Pratap Jowar 2510

राजस्थान में ज्वार की खेती

राजस्थान में ज्वार की खेती लगभग 6.4 लाख हैक्टेयर में की जा रही है एवं मुख्य रूप से अजमेर, नागौर, पाली, टोक, उदयपुर, चित्तौडगढ़, राजसमन्द एवं भीलवाड़ा जिलों में होती है। ज्वार की नई किस्म ‘प्रताप ज्वार 2510’ राजस्थान के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे उन्हें अधिक उत्पादन एवं आर्थिक लाभ प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

Bharat Update 9
Author: Bharat Update 9

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