
Sunita Williams Return To Earth: नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से 9 महीने बिताने के बाद पृथ्वी पर लौटे हैं। हालांकि, इनकी अंतरिक्ष यात्रा के बाद अब उन्हें कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अंतरिक्ष में ज्यादा समय बिताने से शरीर पर दीर्घकालिक असर होता है, जो अब पृथ्वी पर इन दोनों को झेलना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने के कारण शरीर पर कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं। मुख्य रूप से माइक्रोग्रैविटी और विकिरण के संपर्क में आकर अंतरिक्ष यात्री कई शारीरिक परिवर्तनों का अनुभव करते हैं। इस समय शरीर के कुछ अंगों पर तनाव पड़ता है और उनका कार्यक्षेत्र भी प्रभावित होता है।
1. माइक्रोग्रैविटी का प्रभाव
अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी (विभिन्न गुरुत्वाकर्षण बलों की कमी) का प्रभाव मांसपेशियों और हड्डियों पर सीधा पड़ता है। विशेष रूप से पीठ, पैर और कोर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, क्योंकि इनका इस्तेमाल वजन उठाने या सहारा देने के लिए नहीं किया जाता। इससे इन मांसपेशियों में ताकत और द्रव्यमान की कमी हो जाती है, जिसके कारण पृथ्वी पर लौटने पर इनकी सामान्य कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है।
2. हड्डियों में कमजोरी और फ्रैक्चर का खतरा
लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में रहने से हड्डियों में मिनरल्स की कमी हो जाती है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। विशेष रूप से रीढ़, कूल्हों और पैरों की हड्डियों में यह असर अधिक होता है। इससे फ्रैक्चर और हड्डी टूटने का खतरा बढ़ सकता है। पृथ्वी पर लौटने के बाद, अंतरिक्ष यात्री संतुलन बनाए रखने, चलने और खड़े होने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं।
3. भावनात्मक चुनौतियां
अंतरिक्ष में महीनों तक अकेले रहने के कारण, अंतरिक्ष यात्री मानसिक चुनौतियों का भी सामना करते हैं। लगातार एक जैसे वातावरण और सीमित मानव संपर्क के कारण तनाव, चिंता, और कभी-कभी अवसाद जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस मानसिक दबाव को कम करने के लिए अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में फिल्में देखना और संगीत सुनना पसंद करते हैं, लेकिन फिर भी वापस लौटने पर उन्हें भावनात्मक समर्थन की आवश्यकता होती है।
4. कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
अंतरिक्ष यात्री जब लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहते हैं, तो वे कॉस्मिक विकिरण के संपर्क में आते हैं, जो उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। इस विकिरण से शरीर के प्राकृतिक रक्षात्मक तंत्र पर असर पड़ता है, और लौटने के बाद, उन्हें संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, छोटे घावों का भी उपचार लंबा हो सकता है।
5. कैंसर और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा
लंबे अंतरिक्ष मिशनों के बाद, अंतरिक्ष यात्रियों को हृदय संबंधित समस्याओं और कुछ प्रकार के कैंसर का भी खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, अंतरिक्ष यात्री स्पेसफ़्लाइट-एसोसिएटेड न्यूरो-ऑकुलर सिंड्रोम का शिकार हो सकते हैं, जिससे उनके दृष्टिकोण पर असर पड़ सकता है। इस स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों की आंखों की पुतलियों में सूजन आ सकती है, जिससे उनकी देखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
मनोवैज्ञानिक डीब्रीफिंग और परामर्श
इन गंभीर दुष्प्रभावों से बचने और उनके इलाज के लिए अंतरिक्ष एजेंसियां मिशन के बाद अंतरिक्ष यात्रियों की स्वास्थ्य निगरानी करती हैं। पृथ्वी पर लौटने के बाद, अंतरिक्ष यात्रियों को मनोवैज्ञानिक डीब्रीफिंग और परामर्श दिया जाता है, ताकि वे मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें। इसके अलावा, जीवनशैली में बदलाव की भी सलाह दी जाती है, जिससे वे पुन: सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
