
Sunita Williams Return: नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनिता विलियम्स और बर्च विलमोर ने बुधवार को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापसी की, जब उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर नौ महीने से अधिक समय बिताने के बाद, फ्लोरिडा के तट के पास अपना सफल लैंडिंग किया। उनका अंतरिक्ष यान, स्पेसएक्स का ड्रैगन फ्रीडम कैप्सूल, मंगलवार को शाम 5.57 बजे ईटी (बुधवार, 3.27 आईएसटी) के करीब फ्लोरिडा के तलाहसी के पास समुद्र में सुरक्षित रूप से उतरा। व्हाइट हाउस ने एक ट्वीट के माध्यम से इस ऐतिहासिक पल को साझा किया, जिसमें स्पेसएक्स का ड्रैगन अंतरिक्ष यान समुद्र में लैंड करते हुए नजर आया। ट्वीट में लिखा था, “नासा के अंतरिक्ष यात्री नौ महीने के अंतरिक्ष मिशन के बाद पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी कर रहे हैं।” साथ ही व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के वादे को भी पूरा करने की बात की। ट्वीट में यह भी बताया गया, “वादा किया, वादा निभाया, राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन अंतरिक्ष यात्रियों को बचाने का वादा किया था, जो नौ महीने तक अंतरिक्ष में फंसे हुए थे। आज, वे सुरक्षित रूप से अमेरिका के गल्फ में लौटे, यह सब एलन मस्क, स्पेसएक्स और नासा के प्रयासों के कारण संभव हुआ।”
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले वादा किया था कि वह नासा के अंतरिक्ष यात्रियों, सुनिता विलियम्स और बर्च विलमोर को “अंतरिक्ष में फंसे” होने पर बचाएंगे, और व्हाइट हाउस का कहना है कि उन्होंने अपना वादा पूरा किया। दोनों अंतरिक्ष यात्री बुधवार तडक़े 3.27 (भारतीय समय) पर पृथ्वी पर लौटे।
सुनिता विलियम्स का अंतरिक्ष मिशन: एक रिकॉर्ड तोड़ा
सुनिता विलियम्स का अंतरिक्ष मिशन पहले सात दिनों के लिए निर्धारित था, लेकिन एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण इसे बढ़ा दिया गया। उन्होंने स्पेसएक्स कैप्सूल में अपने मिशन को समाप्त किया, जो कि अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से कुछ घंटों बाद ही मेक्सिको की खाड़ी में लैंड कर गया। विलियम्स ने अपने करियर में कुल 62 घंटे नौ अंतरिक्ष वॉक किए हैं, और इसी के साथ वे अब तक की सबसे ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में वॉक करने वाली महिला अंतरिक्ष यात्री के रूप में रिकॉर्ड धारक हैं। उनका यह मिशन और रिकॉर्ड अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारतीय महिलाओँ की अहम भूमिका को उजागर करता है।
यह उपलब्धि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी और स्पेसएक्स के सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें एलन मस्क की स्पेसएक्स तकनीक और नासा की विशेषज्ञता ने मिलकर इस मिशन को सफल बनाया।
