
नई दिल्ली. UP News: अब उत्तर प्रदेश में “A ” का नियम लागू किया जाएगा। यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लिया गया है, और इसके लिए काशी विद्वत परिषद ने विस्तृत खाका तैयार कर लिया है। इस नियम के तहत, प्रदेश के सभी व्रत, पर्व और अवकाश का निर्धारण बनारस से प्रकाशित पंचांग के आधार पर होगा। प्रदेश के पंचांगकारों की सहमति से इस दिशा में कार्य शुरू हो चुका है, और 2026 में इसे पूरी तरह से लागू किया जाएगा।
काशी के पंचांगों में एकरूपता का निर्माण
अब प्रदेश के पंचांगों की तिथियों को एकरूप बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। काशी के पंचांगों में पहले ही एकरूपता स्थापित की जा चुकी है, और अब इसे प्रदेशभर में लागू किया जाएगा। अगले साल नवसंवत्सर (2026) पर इसे आम जनता के लिए लोकार्पित किया जाएगा। इससे प्रदेश में व्रत, पर्व और त्योहारों के बीच होने वाला भेद भी समाप्त हो जाएगा, और सभी लोग एक ही तिथि पर त्योहार मनाएंगे।
“एक तिथि, एक त्योहार” का पंचांग
इस नए पंचांग के जरिए, प्रदेश के सभी प्रमुख त्योहारों और व्रतों की तिथियाँ एक ही दिन पर निर्धारित की जाएंगी। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि इस पंचांग को तैयार करने के लिए काशी के विद्वानों के साथ-साथ प्रदेश के प्रमुख पंचांगकारों की एक टीम बनाई गई है। यह टीम अगले वर्ष की कालगणना, तिथि और पर्व का सटीक निर्धारण करेगी, ताकि एक तिथि एक त्योहार का नियम सही तरीके से लागू किया जा सके।
काशी के पंचांगों में बदलाव
काशी हिंदू विश्वविद्यालय और काशी विद्वत परिषद के सहयोग से काशी के पंचांगों में एकरूपता स्थापित की जा चुकी है। इसके तहत विभिन्न पंचांगों जैसे बीएचयू का विश्व पंचांग, ऋषिकेश, महावीर, गणेश आपा, आदित्य और ठाकुर प्रसाद के पंचांगों को एक समान बनाया गया है। तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद अब काशी के पंचांगों में कोई अंतर नहीं रहेगा।
त्योहारों पर कोई अंतर नहीं होगा
इस नए नियम के तहत, प्रदेश में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों जैसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नवरात्रि, रामनवमी, अक्षय तृतीया, गंगा दशहरा, रक्षाबंधन, श्रावणी, जन्माष्टमी, पितृपक्ष, महालया, विजयादशमी, दीपावली, अन्नकूट, नरक चतुर्दशी, भैया दूज, धनतेरस, कार्तिक एकादशी, देवदीपावली, शरद पूर्णिमा, सूर्य षष्ठी, खिचड़ी और होली पर अब कोई अंतर नहीं होगा। सभी लोग इन त्योहारों को एक ही दिन मनाएंगे, जिससे समाज में होने वाला भ्रम समाप्त हो जाएगा।
समाज में भ्रम का होगा समाधान
बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय पांडेय का कहना है कि पंचांगों में एकरूपता से समाज में होने वाला भ्रम समाप्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ विशेष व्रत और पर्वों का निर्धारण केवल उदया तिथि के आधार पर नहीं होता, बल्कि अन्य समय जैसे मध्याह्नव्यापिनी, प्रदोषव्यापिनी और अद्र्धरात्रि का भी महत्व होता है। इससे त्योहारों और व्रतों का सही निर्धारण होगा, और सभी लोग एक ही दिन इन्हें मनाने में सक्षम होंगे।
