
नई दिल्ली. Waqf Bill Amedment: आज यानी 2 अप्रैल को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पेश किया जाएगा। इसे लेकर जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी तैयारियाँ कर ली हैं, वहीं इस बिल को लेकर संसद में टकराव के आसार हैं। इस विधेयक के समर्थन में एनडीए के सभी घटक दल एकजुट हो गए हैं, वहीं विपक्ष ने भी सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। इंडिया गठबंधन की पार्टीज़ इस विधेयक का विरोध करने की योजना बना रही हैं।
समर्थन में कौन हैं?
विधेयक के पक्ष में नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड), रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (आरवी), और एन चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी ने समर्थन की पुष्टि की है। शिवसेना और लोजपा (आरवी) ने अपने सांसदों को सरकार के रुख का समर्थन करने के लिए व्हिप जारी किया है। एनडीए के प्रमुख घटक दलों जैसे जदयू, तेदेपा, शिवसेना और एलजेपी ने अपने सांसदों को सरकार के पक्ष में वोट देने की ताकीद की है।
विपक्ष का विरोध
विपक्षी दलों ने इस विधेयक को असंवैधानिक और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बताया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, और अन्य प्रमुख विपक्षी दल इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने कहा है कि यह बिल मोदी सरकार के विभाजनकारी एजेंडे का हिस्सा है और इसका उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के हितों को नुकसान पहुँचाना है।
संसद में इस विधेयक की स्थिति
लोकसभा में सत्तारूढ़ भाजपा नीत एनडीए के पास बहुमत है, जिससे विधेयक के पारित होने की संभावना प्रबल है। एनडीए के पास 293 सांसद हैं, जिनमें 240 भाजपा के हैं। इसे पारित करने के लिए 272 वोटों की आवश्यकता है, और एनडीए के पास समर्थन के लिए पर्याप्त संख्या है। वहीं, राज्यसभा में एनडीए के पास 125 सदस्य हैं, जिससे विधेयक पारित होने का रास्ता साफ है।
क्या है वक्फ विधेयक का उद्देश्य?
यह विधेयक भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में सुधार का प्रस्ताव करता है। अगर ये सुधार लागू होते हैं, तो यह वक्फ संपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल और उनके प्रभावी प्रशासन में मदद करेगा। संसद का बजट सत्र 4 अप्रैल को समाप्त होगा, और उस दिन तक इस विधेयक पर चर्चा और वोटिंग हो सकती है। अब देखना यह है कि क्या एनडीए इस विधेयक को पारित करने में सफल हो पाती है या विपक्ष अपनी रणनीतियों से इसे रोक पाएगा।
